Thursday, April 30, 2009

मई सन् 2009

1 मई: श्रीगंगा जयंती सप्तमी, विजया सप्तमी (जम्मू-कश्मीर), श्रमिक दिवस

2 मई: श्रीदुर्गाष्टमी, बगलामुखी महाविद्या जयंती, अन्नपूर्णाष्टमी व्रत, व्यतिपात महापात प्रात: 5.55 से 10.32 तक

3 मई: श्रीसीतानवमी (जानकी जयंती) व्रतोत्सव, मैथिली दिवस

4 मई: श्रीमहावीर स्वामी कैवल्य ज्ञान (जैन)

5 मई: मोहिनी एकादशी व्रत, श्रीहित हरिवंशचन्द्र महाप्रभु जयंती महोत्सव, हिताब्द 536 प्रारम्भ, लक्ष्मीनारायण एकादशी (उडीसा), नारद/शारदा एकादशी (जम्मू-कश्मीर), मंगलनाथ दर्शन-यात्रा (उज्जैन), मीनाक्षी कल्याणम् (दक्षिण भारत), विजया एकादशी व्रत (मिथिलांचल), गौतम स्वामी गणधर पदारोहण दिवस (जैन), श्रमण चतुर्विध संघ स्थापना दिवस (श्वेत. जैन)

6 मई: परशुराम द्वादशी, रुक्मिणी द्वादशी, श्यामबाबा द्वादशी-ज्योति, प्रदोष व्रत

7 मई: नृसिंह जयंती व्रत, छिन्नमस्ता महाविद्या जयंती, ओंकारेश्वर दर्शन-यात्रा

8 मई: नृसिंह चतुर्दशी व्रत (महाभागवतों का), कूर्म जयन्ती, पूर्णिमा व्रत, सत्यनारायण पूजा-कथा, आद्यशंकराचार्य कैलास-गमन तिथि, श्रीगणेश चतुर्दशी (जम्मू-कश्मीर), पाक्षिक प्रतिक्रमण (श्वेत. जैन)

9 मई: स्नान-दान की 'विशाखा' नक्षत्रयुता वैशाखी पूर्णिमा, परमपुण्यकाल प्रात: 9.31 बजे तक, बुद्ध पूर्णिमा-बुद्ध परिनिर्वाण सम्वत् 2553 प्रारम्भ, पीपल पूनम, श्रीराधारमणदेव प्राकट्योत्सव (वृंदावन), गंधेश्वरी पूजा (बंगाल), उज्जैन में अर्धकुम्भ पर्व पर शिप्रा-स्नान, वैशाख स्नान-नियम पूर्ण, रवीन्द्रनाथ टैगोर जयंती,वृन्दावन-विहार, यमराज के निमित्त जलकुंभ-दान

10 मई: जिनवर व्रत प्रारम्भ (जैन), Mother's day

11 मई: देवर्षि नारद जयंती

12 मई: संकष्टी श्रीगणेश चतुर्थी व्रत, अंगारकी चतुर्थी

13 मई: माँ आनन्दमयी जयंती

14 मई: सूर्य की वृष- संक्रान्ति रात्रि 9.40 बजे, विशेष पुण्यकाल दोपहर 3.16 बजे से सूर्यास्त तक, संकल्प में प्रयोजनीय 'ग्रीष्म ऋतु' प्रा., कल्पवासपूर्ण (हरिद्वार)

15 मई: वैधृति महापात अपराह्न 1.41 से सायं 7.44 तक 16 मई: महापंचक प्रारम्भ सायं 6.33 से

17 मई: शीतलाष्टमी (बसौडा), कालाष्टमी, त्रिलोकनाथाष्टमी (बंगाल), रानी अहिल्याबाई जयंती,Rogation Sunday (Christian)

20 मई: अचला (अपरा) एकादशी व्रत, भद्रकाली ग्यारस (पंजाब), जलक्रीडा एकादशी (उडीसा), सूर्य सायन मिथुन राशि में सायं 6.02 बजे

21 मई: एकादशी व्रत (निम्बार्क), तिथिवासर प्रात: 8.21 तक, मधुसूदन द्वादशी,Ascension Day-Holy Thursday (Christian)

22 मई: प्रदोष व्रत, मासिक शिवरात्रि व्रत, वटसावित्री व्रत प्रारम्भ

23 मई: सावित्री चतुर्दशी, पाक्षिक प्रतिक्रमण (श्वेत. जैन)

24 मई: स्नान-दान-श्राद्ध की ज्येष्ठी अमावस्या, वटसावित्री व्रतोत्सव, शनि जयंती, भावुका अमावस्या, Ascension Sunday (Christian)

25 मई: महापंचक सायं 4.03 तक, करिदिन, दस दिन का गंगा दशहरा स्नान प्रारम्भ, नवीन चन्द्र-दर्शन, करवीर व्रत, रोहिणी व्रत (दिग. जैन)

26 मई: रम्भा व्रत, सोपपदा द्वितीया, Zarthost-no-Diso (Parsi)

27 मई: वरदविनायक चतुर्थी व्रत, उमाचतुर्थी, महाराणा प्रताप जयंती, छत्रसाल जयंती, नेहरू स्मृति दिवस, व्यतिपात महापात देर रात 3.27 से

28 मई: श्रुतिपंचमी (जैन), सावरकर जयंती, व्यतिपात महापात प्रात: 9.33 तक

29 मई: अरण्य षष्ठी, विंध्यवासिनी महापूजा, स्कन्द (कुमार) षष्ठी व्रत, जमाई षष्ठी (बंगाल), शीतला षष्ठी (उडीसा), Shabuoth (Jewish)

31 मई: श्रीदुर्गाष्टमी, श्रीअन्नपूर्णाष्टमी व्रत, धूमावती महाविद्या जयंती, ज्येष्ठाष्टमी-मेला क्षीर भवानी (कश्मीर), अष्टमी में शुक्ला देवी का आवाहन, Whit Sunday-Pentecost (Christian)

Friday, April 24, 2009

Your Ad Here दिमागी सक्ति बढाने के आसान फार्मूले हलके फुल्के गाने किया पढाई करते समय दिमाग कुछ दूसरी बातो मै उलझा रहता है / यांनी आप एकाग्रचित नहीं हो पाते है अपने मन को एकाग्र करने का सबसे सरल उपाय है की आप रोजाना एक घंनता गाने सुनना शुरू कर दे ध्यान दे की क्लास्सिकल या वाध यंत्रो पर आधारीत म्यूजिक ही सुने इससे नकेवल आपकी सोचेने की प्रकिर्या पर असर होगा बल्कि आपका कन्सुन्त्रेशन पॉवर धीरे धीरे बढता चला जायेगा यदि आप अपनी रूटीन मै हलके फुल्के गानों को सुनना सामिल कर लेते है तो इससे आपकी मेमोरी पॉवर भी बढती चलीजायेगी

Sunday, April 19, 2009

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Wednesday, April 8, 2009

ज्ञानियोंमें अग्रगण्य हनुमानजी बुद्धि, बल, शौर्य तथा साहस के देवता तो हैं ही, साथ ही वह अपने भक्तों में दया, सत्य, अहिंसा, न्यायप्रियता, सदाचार तथा परोपकार के सद्गुणों का समावेश करके उन्हें श्रेष्ठता भी प्रदान करते हैं।

श्री हनुमान जन्म महोत्सव उत्तरऔर दक्षिण भारत में अलग-अलग तिथियों और महीनों में मनाए जाते हैं। चैत्र पूर्णिमा और कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी पर हनमानजी की जयंती शास्त्रान्तरमें वर्णित है। सेवा और भक्ति के निष्काम आदर्श हनुमान् जी का जन्म माता अंजना के उदर से चैत्र में हुआ बताया गया है। इसमें प्रमाण एवं पुष्टि का आधार है। श्रीरामजीके जन्मार्थयज्ञ से प्राप्त चरूका एक भाग जिसे चील ले उडी थी और वायु मार्ग से वह माता अजंनाको प्राप्त हुआ था जिसे उन्होंने शंकर जी का प्रसाद समझकर ग्रहण किया था।

कार्तिक में लंका विजय से अयोध्या आगमन पर माता सीताजीके पुत्र रूप में उनका जन्म दिन मनाने की परंपरा बन गई। यहीं आती है अद्भुत रामायण की कथा जिस पर गोस्वामी तुलसीदासजीने उनकी स्तुति में लाल प्रयोग किया-

लाल देह लाली लसेअरूधड लाल लंगूर, वज्र देह दानव दलन जय जय जय कपिशू। वह सीताजीके ला हैं और माताजी ने उन्हें शुभाशीषतो लंका में अशोकवाटिकामें प्रथम भेंट में ही दे दिया था। अजर अमर गुननिधिसुत होहु,करहिबहुत रघुनायकछोहू।

अयोध्या में रामजी का राज्याभिषेक होने पर उपहार स्वरूप सीता माता ने हनुमान् जी को बहुमूल्य मोतियों की माला दी। उसके मनकेतोड तोडकर उसमें हनुमान् जी सीताराम की उपस्थिति देखने की चेष्टा कर रहे हैं। वहीं टोके जाने पर अपना वक्षस्थल फाडकर अपने हृदय में युगल जोडी की उपस्थिति दिखाई तो माता जी ने कहा, वत्स मेरे पास अमूल्य तो मात्र सुहाग का सिंदूर है जिसे सीमंतमें धारण करने से हमारे स्वामी की दीर्घायु होती है। तुम भी इसमें से थोडा सा ले लो।

हनुमान् जी ने सारे शरीर में सिंदूर पोत लिया कि सीमंतमें चुटकी भर सिंदूर से श्रीराम की आयु बढती है तो मैं सारे शरीर पर सिंदूर धारण कर उन्हें अजर-अमर ही क्यों न बना दूं। तभी से उनको सिंदूर का चोला चढने लगा।

वैसे जयन्तियांतो महामानवोंसे प्रेरण ग्रहण करने के लिए ही मनाई जाती हैं और सिंदूर का चोला भी महावीर बुद्धिमान एवं प्रथम पूज्य क्रमश:हनुमान् जी, भैरों एवं गणेशजीको चढता है। हनुमान् जी पवन पुत्र हैं उनका वेग भी पवन के समान है। ज्ञानियोंमें अग्रगण्य और बुद्धिमानों में वरिष्ठ अतुलित बलधामहैं जिनके स्वामी राम हैं। जयत्यतिबलो रामोलक्ष्मणश्चमहाबल:राजा जयतिसुग्रीवो।

राघवेणाभिपालित:दासोअहंकोसलेन्द्रस्यरामस्याक्लिष्टकर्मण11

न रावणसहस्त्रंमेयुद्धेप्रतिबलंभवेत्।

अखंड ब्रह्मचर्य,तपस्या, भक्ति और सेवा से हनुमान् जी रिद्धि-सिद्धिके दाता सभी कार्यो के संपन्न होने में अमोघ सहायक संकट हरने और सुख देने वाले बन गए। जहां होती है रामकथा वहां वह अवश्य पहुंचते हैं।

ग्यारहवें रूद्रहनुमान् रामजी के दर्शन कराने में जिनको निमित्तबनाने से गोस्वामी तुलसीदासजीकृत-कृत्य हो गए। हनुमान् जी के इष्ट हैं श्रीराम जिनकी मैत्री वे स्वयं ही सुग्रीव से कराते हैं। सीता माता का पता लगाने के लिए 100योजन का समुद्र पार कर गए तो रावण की सोने की लंका भी जला दी और लक्ष्मण के प्राणों की की रक्षा के लिए धौला गिरि से संजीवनी लाने में भी सफल रहे। रामजी ने कहा कि मैं तुमसे ऋणमुक्त नहीं हो सकता तुम तो मुझे भरत भाई की तरह ही प्रिय हो। उनकी जयंती पर हम भी हनुमान् जी से बल और बुद्धि में उनके व्रत से अनुगामी हों। उनको प्रणाम करें।

अतुलितबलधामंहेमशैलाभदेहं

दनुजवनकृशानुंज्ञानिनामग्रगण्यम्।

सकलगुणनिधानंवानराणामधीशं

रघुपतिप्रियभक्तंवातजातंनमामि।।

अर्थात् स्वर्ण पर्वत जैसी देह, अतुलित बल के धाम, राक्षस वन के लिए अग्नि, ज्ञानियोंमें अग्रगण्य, सभी गुणों के आगार, वानरों के स्वामी, रघुपति के प्रिय भक्त पवन पुत्र को सादर नमन व प्रणाम।